Sunday, February 21, 2010

नेताओं का बदलता राग

आज जब पूरा दे”ा, आंतकवाद और नक्सलवाद जैसी समस्याओं से जुझ रहा है, तो दूसरी तरफ हमारे दे”ा के कुछ राजनेता क्षेत्रवाद और जातिवाद जैसे मुद~दों पर बहस करने में लगे हुए हैं।
”िावसेना, मनसे के नेता और कार्यकर्ता लोगों को भड़काकर क्षेत्रवाद के जाल में फंसा अपने उल्लू सीधा करने में लगे हैं। जिससे आम आदमी परे”ाान होकर अपने घर वापस लौट रहा है। जब वह अपने घर या राज्य से नौकरी की तला”ा में दूसरे राज्य में पहुंच कर अपना और अपने परिवार वालों का पेट पालने में लगा रहता है, तो उसे उस राज्य से वापस इसलिए लौटना पड़ता है क्योंकि उन्हें मराठी नहीं आती। क्या !उसका भारतीय होना काफी नहीं ?
यह एक गंभीर मुद~दा है कि आज के नेता अपनी राग बदलकर क्षेत्रवाद जैसे मुद~दों से अपनी रोटियां सेंकने में लगे है जो कि सफेद पो”ा राजनेताओं की काली करतूत को साफ-साफ उजागर करती है।-महफूज आलम

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